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भगीरथ : भारत बदलने वाले नायक Bhagirath: The legend who changed India

दोस्तों, आज हम भगीरथ के बारे में बात करेंगे। मान्यता है कि भगीरथ ही गंगा नदी को इस भारतभूमि पर लेकर आये थे। इस अप्रतिम कार्य को करने के कारण वह भारतीय संस्कृति के सबसे बड़े नायकों में अपना स्थान रखते हैं। आइये, आज इस लेख में हम संक्षिप्त रूप में भगीरथ के प्रयासों, कार्यों एवं उन घटनाओं की चर्चा करेंगे जिनके चलते गंगा नदी का इस भारतभूमि पर अवतरण हुआ। इस पौराणिक कथा में छिपे उन भौगोलिक और वैज्ञानिक तथ्यों की चर्चा भी हम करेंगे जो धार्मिक आस्था के पीछे छिपे होने के कारण अक्सर हमें नजर नहीं आते। चलिए, शुरू करते हैं। भगीरथ कोई आम इंसान नहीं थे। वह राजा थे।परम प्रतापी राजा दिलीप के पुत्र थे। भारत के सर्वाधिक शक्तिशाली राज्यों में से एक अयोध्या के सम्राट थे। लेकिन एक बात उन्हें हमेशा दुखी करती रहती थी। दरअसल, कई पीढ़ी पहले राजा सगर नाम के एक पूर्वज थे। उनके सगर नाम रखे जाने के पीछे एक कारण था। सगर का अर्थ होता है विष से भरा व्यक्ति। जब वे अपनी माता के गर्भ में थे तभी उन्हें विष देकर मारने का प्रयास हुआ था। उस समय महर्षि च्यवन ने सही चिकित्सा करके उनकी माता की रक्षा की थी। आगे जाकर जब ...

मन की बात: योगविज्ञान के साथ Chittabhumi: Five states of mind

दोस्तों, आज हम एक महत्वपूर्ण topic पर बात करेंगे। योग पर अपनी चर्चा को आगे बढ़ाएंगे। सरल और रोचक तरीके से। आज बात करते हैं चित्त भूमियों के बारे में। इसका जिक्र महर्षि पतंजलि ने अपने योगसूत्र ग्रंथ में किया है। उनका यह ग्रंथ पूरे योगविज्ञान का आधार है। पतंजलि की एक बहुत बड़ी खासियत है। हर सिद्धान्त को बड़े संक्षेप में कहते हैं। चित्त भूमियों के बारे में वे कहते हैं-" क्षिप्त, मूढ़, विक्षिप्त, एकाग्र और निरुद्ध, चित्त की ये पांच भूमियां हैं।" आइये, उनकी बात को समझने की कोशिश करते हैं। चित्त क्या है? मोटे तौर पर कहा जाए तो मन ही हमारा चित्त है। प्यार, नफरत, क्रोध, ममता आदि जितनी भी भावनाएं हैं सब चित्त अर्थात मन में महसूस होती हैं। मन पांच अवस्थाओं में रह सकता है। जिस अवस्था में मन रहेगा, उस व्यक्ति की मानसिक ऊर्जा और क्षमता भी उसी तरह की हो जाएगी। आइये और सरल ढंग से समझें। "मन की पांच अलग अलग अवस्थायें क्यों हैं। ये एक अवस्था में हमेशा क्यों नहीं रहता" "ऐसा इसलिए कि आप जीवन की तमाम भावनाओं का अनुभव कर सकें। जब जैसी परिस्थिति आती है, मन उस अवस्था में च...

चुनाव की बात: प्राचीन लोकतंत्र वैशाली के साथ World's most ancient democracy: Vaishali

मित्रों, आज हम एक  contemporary अर्थात समसामयिक विषय पर चर्चा करेंगे। हमारे देश में इस समय चुनाव चल रहे हैं। लोकसभा हो या विधानसभा, पंचायतें हों या नगर निगम, देखा जाए तो हर साल कोई न कोई चुनाव होता ही रहता है। चुनाव इसलिये कराए जाते हैं जिससे जनता के पसंदीदा व्यक्तियों को चुना जा सके। ये चुने गए प्रतिनिधि ही विभिन्न स्तरों पर देश को चलाने का कार्य करते हैं। हमारे संविधान में इनकी चुनाव प्रक्रिया, शक्तियों और कार्यों के बारे में सुनिश्चित प्रावधान बनाये गए हैं। एक सवाल अक्सर हमारे सामने आता है। हमारे नेता में कौन सी विशेषताओं का होना जरूरी है? इस प्रश्न का उत्तर दुनिया के किसी भी संविधान में नहीं है। सारे लोकतांत्रिक संविधान बस एक ही बात कहते हैं-" जिसे जनता बहुमत से चुन ले, बस वही नेता है।" आइये इस प्रश्न को थोड़ी देर के लिए छोड़ देते हैं। चलते हैं प्राचीन भारत में। वज्जि गणराज्य को विश्व का सबसे प्राचीन लोकतंत्र माना जाता है। यह कहाँ था? यह आधुनिक बिहार के मुजफ्फरपुर, वैशाली नामक जिलों में फैला हुआ एक गणराज्य था। इसकी राजधानी वैशाली थी। वज्जियों की शासन प्रणाली हैरान...

शबरी: एक बेमिसाल व्यक्तित्व shabri: A tale of adamant faith

दोस्तों, आज हम बात करेंगे शबरी के बारे में। भारतीय संस्कृति का यह एक ऐसा व्यक्तित्व है जिसकी चर्चा बहुत कम की जाती है। क्या आपने कभी रामायण की कथा पढ़ी है? इसमें शबरी का जिक्र आता है। वही शबरी जिसके जूठे बेर भगवान राम ने बड़े प्रेम से खाये थे! उसके आश्रम में जाकर उसे सम्मानित किया था। कथा कहती है कि शबरी पहले एक मामूली वनवासी कन्या थी। अनपढ़ थी। घरवालों ने उसे निकाल दिया था। बहुत कठिन संघर्षों के बीच उसने अपना जीवन बिताया। आइये आज हम उन घटनाओं की चर्चा करेंगे जिन्होंने एक मामूली आदिवासी कन्या को ऐसा सम्मानित स्थान दिलाया जो कि बड़े बड़े ऋषियों के लिए भी दुर्लभ था। आइये चलते हैं रामायणकालीन भारतवर्ष में। उस समय उत्तर भारत में आर्य राजाओं का शासन था। अयोध्या, मिथिला, कोशल, केकय आदि उनमें प्रसिद्ध थे। विंध्य पर्वत के दक्षिण में वनवासी जातियों के राज्य स्थित थे। इनमें किष्किंधा बहुत शक्तिशाली था। इनके भी सुदूर दक्षिण में उन जातियों का शासन था जो अपने आप को राक्षस कहते थे। आयों और इनके बीच प्रबल शत्रुता थी। वनवासी कबीलों के छोटे छोटे राज्य आर्यों और राक्षसों के बीच एक सीमा रेखा या ...

श्रीकृष्ण: एक युगान्तकारी व्यक्तित्व Krishna : ek yugantkari vyaktitva

आज बात करते हैं श्रीकृष्ण के बारे में। इनके बारे में लिखना बहुत मुश्किल है। क्यों? ये अनगिनत घटनाओं के नायक हैं। सारी घटनाएं एक दूसरे से जुड़ी हैं।प्रसिद्ध भी हैं। इनपर कुछ भी लिखना हो तो घटनाएं जुड़ती चली जाएंगी।एक ग्रंथ बन जायेगा।इस तरह देखा जाए तो संक्षेप में कुछ लिख पाना अत्यंत मुश्किल है। लिखने की बात रहने दें।आज कुछ चर्चा करते हैं। इसी बहाने श्रीकृष्ण का स्मरण भी होगा! यह एक सर्वमान्य सिद्धांत है कि महापुरुषों का स्मरण हमारी सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है।हमें शक्ति देता है। पहले कुछ विज्ञान की बात करते हैं। श्री रंगनाथ राव भारत के शीर्ष archaeologist अर्थात पुरातत्व वैज्ञानिकों में से एक हैं।वे भारतीय समुद्र अध्ययन संस्थान से जुड़े थे। ये क्या है? ये समुद्र के ऊपर शोध करता है। डॉ रघुनाथ ने एक बहुत बड़ी खोज की।द्वारिका की खोज। समुद्र में डूबे इस नगर के ऊपर उन्होंने एक किताब लिखी। The Lost City of Dwarika। इसमें उन्होंने बताया कि हजारों साल पहले द्वारिका नाम का एक अत्यंत उन्नत नगर था।इसकी रचना वैज्ञानिक ढंग से की गयी थी। आगे जाकर समुद्र का जलस्तर बढ़ा और यह नगर समुद्र में डूब ग...

योग के लाभ: एक संक्षिप्त विश्लेषण Benefits of Yoga: A brief Analysis

दोस्तों, योग से लाभ होता है।ये बात आज सब मानते हैं।किस तरह के लाभ होते हैं, आप सुनते भी होंगे। जैसे? योग प्राणऊर्जा को बढ़ाता है।वात, पित्त, कफ त्रिदोषों को संतुलित करता है।सुषुम्ना के चक्रों को balance करता है।नाड़ियों के अवरोध दूर करके उनकी कार्यशक्ति बढ़ाता है।.....आदि। अब एक प्रश्न का उत्तर दीजिये- क्या आपको ऊपर लिखे लाभ समझ में आ रहे हैं? अगर आपको त्रिदोष, सुषुम्ना, नाड़ी चक्र आदि बातें समझ में नहीं आतीं तो ये बिल्कुल स्वाभाविक है। क्यों? क्योंकि ये योग के ग्रंथों में लिखी classical terms हैं।एक आम आदमी के लिए ये जटिल शब्द हैं क्योंकि उसने योग की किताब नहीं पढ़ी।योग के बारे में बताने के लिए अक्सर लोग इन जटिल शब्दों का use करते हैं और आम आदमी को लगता है- " ये तो मुश्किल चीज़ है"। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। आइये, आज हम एक आम आदमी के लिए योग के लाभों को बिल्कुल सरल भाषा में समझें। समझते हैं कि योग करने से हमारे शरीर को क्या क्या लाभ मिलते हैं। आइये शुरू करते हैं। योग का सबसे पहला फायदा क्या है? आपको पीठ सीधी करके बैठने की आदत पड़ेगी।योग की क्लास में ये चीज़ शुरू म...

योग के महापुरुष: महर्षि वशिष्ठ Yog ke Mahapurush: Maharishi Vashishth

दोस्तों, पिछले लेख में हमने चर्चा की थी महर्षि पतंजलि और अष्टावक्र के बारे में। आज हम इसे आगे बढ़ाते हुए कुछ और महापुरुषों के बारे में जानेंगे जिन्होंने योगविज्ञान में नए आयाम स्थापित किये और आम जनता को लाभान्वित किया। इन्होंने पूरे समाज को एक नई दिशा दी तथा शासकों ने भी इन्हें पूरा support दिया। आइये शुरू करते हैं। वशिष्ठ का नाम योग गुरुओं में बहुत ऊंचा है। वो भगवान राम के गुरु थे, एक महान ऋषि अर्थात महर्षि थे। वास्तव में रघुकुल राजवंश के गुरुओं की उपाधि वशिष्ठ हुआ करती थी। " रघुकुल क्या था?" " रघुकुल भारत के सर्वाधिक शक्तिशाली राजवंशों में एक था।इनकी राजधानी को अयोध्या कहा जाता था। "इनकी राजधानी का नाम अयोध्या क्यों पड़ा था"? क्योंकि उसे किसी प्रकार से भी जीता नहीं जा सकता था। अब आप अनुमान लगा सकते हैं- कि उस युग में वशिष्ठ की power क्या रही होगी! वशिष्ठ किसलिए प्रसिद्ध थे? अपनी योग साधना के लिए। योग का उनका व्यवहारिक ज्ञान उस समय में सबसे अधिक था।उनकी पत्नी अरुधंति भी गुणों में उनकी तरह थी। जनता में उनकी अथाह लोकप्रियता थी। एक चीज़ और थी। उन्होंने ...