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सम्राट भरत: जिन्होंने बनाया हमारा भारत !Emperor Bharat: who built The Indian Nation

सम्राट भरत की जन्मस्थली कण्व आश्रम में मौजूद मंदिर दोस्तों, आज हम बात करेंगे सम्राट भरत की।उन महान शासक के बारे में जिनके नाम पर हमारे देश का नाम भारत रखा गया। सम्राट भरत ने अलग अलग फैले आर्यावर्त के कबीलों को एक सूत्र में बांधकर एक सार्वभौमिक राष्ट्र बनाया। आम आदमी के उत्थान पर केंद्रित नीतियां बनायीं। यह मर्यादा बनाई कि राजा ईश्वर का एक प्रतिनिधि है जिसका कार्य जनता  की सुरक्षा और उसका विकास करना है।चक्रवर्ती सम्राट भरत का साम्राज्य हिमालय से लेकर समुद्र के बीच फैला था। यहां की संतानों को भारती अथवा भारतीय कहे जाने की परंपरा तभी से शुरू हुई, जो आज भी जारी है। भारत के इस महान चक्रवर्ती सम्राट का जन्म कण्वाश्रम में हुआ था। उनका लालन पालन महान ऋषि कण्व के सान्निध्य में हुआ। कण्व ऋषि के इस आश्रम का वर्णन स्कन्द पुराण एवं महाकवि कालिदास की रचनाओं में विस्तृत रूप से आता है। आज हम इसी पावन स्थली कण्व आश्रम की चर्चा करेंगे जहां जाना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय होना चाहिए। लेकिन वहां जाकर मुझे जो दिखा, एक भारतीय के तौर पर हम सभी को बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करता है। शुरुआत...

श्रीहनुमान चालीसा: योग के संदर्भ में परिचय Srihanuman Chalisa: Understanding in Yogic context

मित्रों, आज हम चर्चा करेंगे उस चौपाई की जिससे श्रीहनुमान चालीसा शुरू होती है। " जय हनुमान ज्ञान गुन सागर जय कपीश तिहुँ लोक उजागर।।" आइये , अब इसका शाब्दिक अर्थ समझें। " उन हनुमान जी की जय हो, जो ज्ञान और गुणों के सागर हैं। कपियों के अधिपति अर्थात हनुमानजी की जय हो जो तीनों लोकों में उजागर अर्थात प्रसिद्ध हैं" मित्रों, अब हम इसके भावार्थ को देखेंगे। एक एक शब्द में छिपे गहन अर्थ को समझने का प्रयास करेंगे। सबसे पहले " जय हनुमान" कहकर हनुमानजी की जयकार की गई है। ऐसा क्यों? आइये एक उदाहरण से समझें। क्या आप किसी राजनीतिक रैली में गए हैं! वहां क्या होता है? जैसे ही कोई बड़े नेता आते हैं, जनता जिंदाबाद के नारे लगाती है।हर तरफ जोश ही जोश दिखने लगता है! ऐसा क्यों किया जाता है? ऐसा इसलिए किया जाता है कि नेता अथवा नायक को उसके बल का भान कराया जा सके। जब किसी को अपनी शक्तियों के ऊपर विश्वास हो, तभी वह किसी अभियान को उचित दिशा दे सकता है एवं जनसमूह का नेतृत्व कर सकता है। नायक जब अपनी शक्तियों पर भरोसा करते हुए जनसामान्य का आह्वान करता है तो उसका जो...

आइये, समझें वैदिक शिक्षा प्रणाली को: Let us understand Vedic Education System

दोस्तों, विश्वास है आप सभी सकुशल और सानंद हैं। आज हम यौगिक मनोविज्ञान के ऊपर आधारित प्राचीन गुरुकुलों की शिक्षा पद्दति पर बात करेंगे और देखेंगे कि इसे आधुनिक शिक्षा पद्दति में शामिल करके कैसे विद्यार्थियों के लिए सर्वोत्तम परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। आइये, शुरू करें। श्रीरामचरितमानस की एक चौपाई है- "गुरु गृह गए पढन रघुराई, अल्प काल विद्या सब पाई"। "मतलब?" " जब रघुनाथ जी गुरु के घर अर्थात गुरुकुल पढ़ने गए तो उन्होनें अल्प काल में ही सारी विद्याएं प्राप्त कर लीं।" अत्यधिक कम समय में ही शास्त्र और शस्त्र विद्याओं में पारंगत होने का ही प्रभाव था कि रघुनाथ जी महर्षि विश्वामित्र की नजरों में आये। उन्हें महर्षि ने अपने आश्रम की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा और आगे जाकर अपनी युद्धकला भी सिखाई। महर्षि वशिष्ठ का सम्पूर्ण शास्त्रज्ञान और महर्षि विश्वामित्र का सम्पूर्ण शस्त्रज्ञान श्रीराम में समाहित हो गया। इस तरह वह इस पृथ्वी के तीसरे ऐसे व्यक्ति बने जो शास्त्र और शस्त्र इन दोनों ही क्षेत्रों में चरम सीमा का ज्ञान रखते थे। उनके अलावा अन्य दो व्यक्ति थे- परशु...

रामनाम का अवलंबन: Lord's Name is the only remedy

दोस्तों, आज हम श्रीरामचरितमानस का एक सूत्र लेंगे और उसका विस्तृत विश्लेषण करेंगे। "नहिं कलि करम न भक्ति विवेकु। रामनाम अवलंबन एकु।" आइये, इसका अर्थ समझें। "कलियुग में कर्म, भक्ति और  विवेक अर्थात ज्ञान ये तीनों ही देखने को नहीं मिलते । अतः रामनाम ही एकमात्र उपाय बचता है।" कलियुग मतलब? कलियुग मतलब ऐसा युग जिसमें मानवीय गुणों जैसे दयालुता, ईमानदारी, सत्य, अहिंसा का अभाव है। जिसकी नीतियां और जीवनशैली मानवमात्र के मन और प्राणों को जला रही हैं। इस युग में सत्ता, समाज , धर्म और आर्थिक संसाधनों का नियंत्रण एक छोटे समूह के हाथों में होता है जो बहुसंख्यक आम जनता के प्रति संवेदनशील नहीं होते। इस तरह की स्तिथि में आम जनता अनेक तरह की गरीबी, अत्याचार, भेदभाव और शोषण का शिकार होती है। ऐसी घटनाओं को देखकर लोग कह बैठते हैं-"भाई! घोर कलियुग आ गया है"। अब एक दिलचस्प बात! कलियुग के बाद हमेशा ही सतयुग आता है। सतयुग, जिसमें मानव सभ्यता अपने आदर्श स्वरूप में होती है। अब एक सवाल लीजिये। कलियुग के बाद सतयुग ही क्यों आता है? आइये, विस्तार से समझें। कलियुग इसी वजह ...

एक राष्ट्रीय तीर्थ स्थल की यात्रा:Pilgrimage to know our India

आज हम एक ऐसे तीर्थ के बारे में जानेंगे जहां जाकर अपने प्यारे भारत देश की आत्मा को महसूस किया जा सकता है। प्रख्यात तीर्थ नगरी हरिद्वार में स्थित भारत माता मंदिर अपने निर्माण के समय से ही राष्ट्रवादी भक्तों की आस्था का केंद्र रहा है। शुरू में ही अनुरोध करता हूं। अगर हरिद्वार जाना हो, तो यहां जरूर जाएं।अगर भारतमाता की अमर संतानों को जानना हो तो यहां जरूर जाएं। अगर आप अपने भारत के भौतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक स्वरुप को देखना चाहते हैं तो यहां जरूर जाएं। इस मंदिर में क्या है? यहां धार्मिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र की विभूतियों के दर्शन किये जा सकते हैं जिनके विचारों, शिक्षाओं एवं प्रयासों ने आज का भारत गढ़ा है।भारत के बारे में अनेक क़िताबें पढ़कर भी उतना जानना संभव नहीं, जितना यहां आकर एक बार घूमने से मिल सकता है! आइये, इस मंदिर का इतिहास जानें। 180 फ़ीट ऊंचे इस मंदिर का निर्माण स्वामी सत्यमित्रानंद जी के द्वारा सन 1983 में कराया गया। उस वक़्त की हमारी प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने इसका उद्घाटन किया। आइये, अब इसे घूमने चलें। यह मंदिर आठमंजिला है। इसकी हर मंजिल...

नहुष: एक पौराणिक कहानी Nahush: A story from Puranas

मित्रों, विश्वास है कि ये वेबसाइट आपको कुछ अच्छे विचारों से अवगत कराने में कारगर हो रही है! इसके पीछे आपलोगों का ही प्रेम और स्नेह है। आज हम एक पौराणिक कहानी लेंगे और इसका ऐतिहासिक, वैज्ञानिक और तार्किक विश्लेषण करेंगे। हम देखेंगे कि हिन्दू धर्मग्रंथों की ये कहानी केवल कपोल कल्पना नहीं है।आप धार्मिक आस्था को परे रखकर अगर इसका इतिहास और विज्ञान की कसौटी पर तार्किक विश्लेषण करें, तो यह कहानी अपने असली स्वरूप में सामने आती है! आइये, शुरू करते हैं। राजा नहुष का वर्णन महाभारत में आता है। वह बहुत शक्तिशाली और लोकप्रिय राजा थे। उनके राज्य की शासन व्यवस्था को आदर्श माना जाता था।धर्म की उच्चतम मर्यादाओं पर आधारित शासन चलानेवाले नहुष का देवता भी सम्मान करते थे। अचानक देवलोक पर एक विपदा आ गई। असुरों ने आक्रमण करके देवताओं को परास्त कर दिया! देवराज इंद्र का आत्मविश्वास हिल गया। वे किसी अज्ञात स्थान पर जा छिपे! लेकिन बाकी देवगण डटे रहे। उन्होनें स्वर्ग वापस छीन लिया। असुरों को भगा दिया। अब देवताओं ने इंद्र से वापस आने का अनुरोध किया। लेकिन इंद्र नहीं माने। मानते भी कैसे? आप खुद सोचिए...

नचिकेता: मृत्यु से जीतनेवाला युवा Nachiketa : youth who conquered death

दोस्तों, आज कठोपनिषद के कुछ श्लोकों को देख रहा था!चलिए,आज इसीपर बात करते हैं। एक बात है! जब पूरे विश्व में सभ्यता का नामोनिशान नहीं था, उस समय भी भारतभूमि में वेद और उपनिषदों का प्रचार था! उन्नति की  चरम सीमा पर पहुंचा मानव मष्तिष्क ही वेद और उपनिषद में वर्णित विषयों को सोच सकता है।सोचिए, उनको रचनेवाले और हजारों पीढ़ियों तक उनको कंठस्थ करके सहेजनेवाले कैसे कमाल के लोग रहे होंगे! है न!!! मित्रों, मरते दम तक गर्व करो कि हम उस महान परंपरा के वंशज हैं! गर्व करो कि हम उसी धरती पर रहते हैं जिसपर कभी वो महापुरुष भी रहते थे, चलते थे और बोलते थे। उन्हीं की वजह से कभी हम विश्वगुरू भी कहे जाते थे! दोस्तों, अब भावुकता को छोड़ते हैं। आइये वापस कठोपनिषद पर! कठोपनिषद कमाल का ग्रंथ है! यह कृष्ण यजुर्वेद का एक भाग है। इसमें दो अध्याय हैं। ये अध्याय वल्लियों में बटें हुए हैं। प्रथम अध्याय में 71 और द्वितीय में 48 मतलब 119 कुल मंत्र हैं। इसकी रचना महान ऋषि कठ ने की। उनके नाम पर ही इस ग्रंथ का नाम रखा गया। अब जानते हैं कि कठोपनिषद में क्या कहा गया है। इसमें नचिकेता और मृत्यु के देवता यम...